Product Code :CSBS 31
Author : Dr.Giri Ratna Mishra
ISBN : 978-9349703568
Bound : Hard Cover
Publishing Date : 2026
Publisher : Chaukhamba Surbharati Prakashan
Pages : 1216
Language : Sanskrit Text and English Transalation
Length: 0 cm
Width : 0 cm
Height : 0 cm
Weight : 0 gm
Availability : 10
ब्रह्माण्ड महापुराण सनातन धर्म के 18 महापुराणों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अंतिम (18वाँ) पुराण माना जाता है। मध्यकालीन भारतीय साहित्य में इसे 'वायवीय पुराण' या 'वायवीय ब्रह्माण्ड' के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसमें ब्रह्मांड का वर्णन मुख्य रूप से वायु देव ने महर्षि वेदव्यास जी को प्रदान किया था
इस महापुराण में कुल 12,000 श्लोक हैं और इसे मुख्य रूप से 4 भागों (पादों) में विभाजित किया गया है
प्रक्रियापाद (पूर्व भाग): इसमें सृष्टि की उत्पत्ति, हिरण्यगर्भ की कथा और बुनियादी धार्मिक कर्तव्यों का वर्णन है।
अनुषंगपाद (पूर्व भाग): इसमें कल्प, मन्वन्तर, युग और पृथ्वी के भूगोल का विस्तृत विवरण मिलता है।
उपोद्घातपाद (मध्यम भाग): इसमें ऋषियों के वंश, भार्गव परशुराम का चरित्र, सगर की उत्पत्ति और सूर्य-चन्द्र राजवंशों का इतिहास है।
उपसंहारपाद (उत्तर भाग): इसमें भविष्य के मन्वन्तर, नरक का विवरण, और अंत में शिवधाम व मोक्ष का वर्णन है
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