उपनिषद् एक गम्भीर और गूढ़ वैदिक-साहित्य है। अपौरुषेय वेद का अन्तिम भाग कहे जाने के कारण यह वेदान्त के नाम से अभिहित तो है ही, यह वेद के ज्ञानकाण्ड के नाम से भी जाना जाता है। उपनिषदों की बृहद् श्रृंखला की चर्चा न कर, ‘औपनिषदिक विद्याएँ’ नामक इस पुस्तक में उनके तात्त्विक विचारों एवं उनके विद्याओं में से कुछ चुने हुए मन्त्रों को लेकर संक्षिप्तरूप में इस पुस्तक की निर्मिति हुई है। अविद्या का नाशक और विद्या का प्रकाशक होने के कारण उपनिषद् आत्मज्ञान और ब्रह्मज्ञान कराती है। उपनिषद् साहित्य पढ़ने का ध्येय अथवा उद्देश्य ब्रह्मतत्त्व की निश्चयता एवं यथार्थता का दिग्दर्शन करना ही है। उपनिषद् प्रेमियों एवं जिज्ञासुओं के लिए निस्सन्देह ‘औपनिषदिक विद्याएँ’ नामक यह पुस्तक विशिष्ट कही जा सकती है। अतः इस पुस्तक के माध्यम से आध्यात्मिक विचारों को दृढ़ बनाने का प्रयास किया गया है। पुस्तक का अनुशीलन कर पाठक निश्चय ही लाभान्वित होगा।