पुस्तक परिचय
तृचभास्कर महान तांत्रिक आचार्य भास्करराय मखिन् कृत एक अद्वितीय ग्रंथ है, जो ऋग्वेद की तीन ऋचाओं पर आधारित रोग निवारण एवं सूर्य उपासना के गूढ़ रहस्यों का विवेचन करता है। यह ग्रंथ वैदिक मंत्रों की आध्यात्मिक शक्ति और तांत्रिक साधना की प्रयोगात्मक पद्धति का अद्भुत संगम है। भास्करराय ने इसमें सूर्य को रोग-नाशक, जीवनदायी और आत्मप्रकाश के प्रतीक रूप में स्थापित करते हुए, मनुष्य के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कल्याण के उपाय बताए हैं।
इस ग्रंथ का यह संस्करण विशेष है क्योंकि इसमें पंडित राधेश्याम चतुर्वेदी द्वारा रचित ज्ञानवती हिंदी व्याख्या पहली बार प्रकाशित की जा रही है। उनकी व्याख्या वैदिक ऋचाओं के गूढ़ अर्थों को सरल, भावपूर्ण और व्यावहारिक दृष्टि से प्रस्तुत करती है, जिससे पाठक न केवल ग्रंथ की तांत्रिक गहराई समझ सके, बल्कि उपासना और साधना में उसका प्रयोग भी कर सके।
वैदिक दर्शन, तंत्रशास्त्र और उपासना की त्रिवेणी को एक सूत्र में बाँधने वाला तृचभास्कर साधकों, अध्येताओं और अध्यात्मप्रेमी पाठकों के लिए अमूल्य ग्रंथ है—जो सूर्य के माध्यम से आत्मप्रकाश और आरोग्य की दिशा में ले जाता है।